
संस्कृति
संझा की ओट में: मालवा की लुप्त होती भित्ति चित्रकारी का भविष्य
मिट्टी की महक और कुंवारी लोक-कला के बीच, संझा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्त्री-अभिव्यक्ति का एक मौन घोषणापत्र है।
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