12 बातें जो 2026 में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने से पहले जाननी चाहिए
अपने घर पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाकर बिजली के बिलों में कटौती करें और एक स्थायी भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।

बढ़ते बिजली बिल और जलवायु परिवर्तन की चिंता आज हर भारतीय घर में चर्चा का विषय है। क्या हो अगर आपको बताया जाए कि आपकी छत ही इस समस्या का समाधान बन सकती है? जी हाँ, रूफटॉप सोलर पैनल लगाकर आप न केवल अपने बिजली के बिल को लगभग शून्य कर सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के साथ, 2026 में अपने घर को सौर ऊर्जा से संचालित करना पहले से कहीं ज़्यादा आसान और फायदेमंद हो गया है।
लेकिन, इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझना आवश्यक है। सोलर पैनल क्या हैं, इनकी लागत कितनी आती है, कौन-सा पैनल आपके लिए सही है, और सरकारी सब्सिडी कैसे प्राप्त करें? इन सभी सवालों के जवाब आपको इस विस्तृत लेख में मिलेंगे। आइए, उन 12 ज़रूरी बातों पर गौर करें जो आपको रूफटॉप सोलर पैनल लगाने से पहले जाननी चाहिए।
1. रूफटॉप सोलर पैनल की मूल बातें समझें
रूफटॉप सोलर पैनल एक ऐसी तकनीक है जो सूर्य के प्रकाश को सीधे बिजली में परिवर्तित करती है। ये पैनल फोटोवोल्टिक (PV) कोशिकाओं से बने होते हैं, जो सिलिकॉन जैसे अर्धचालक पदार्थों से निर्मित होती हैं। जब सूर्य की रोशनी इन कोशिकाओं पर पड़ती है, तो वे एक विद्युत क्षेत्र बनाती हैं, जिससे डायरेक्ट करंट (DC) बिजली उत्पन्न होती है। इस DC बिजली को एक इन्वर्टर की मदद से अल्टरनेटिंग करंट (AC) में बदला जाता है, जिसका उपयोग हम अपने घरों में उपकरणों को चलाने के लिए करते हैं। यह एक स्वच्छ, नवीकरणीय और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत है जो आपकी ग्रिड पर निर्भरता को काफी कम कर देता है।
एक सामान्य रूफटॉप सोलर सिस्टम में सोलर पैनल, एक इन्वर्टर, एक माउंटिंग स्ट्रक्चर (जो पैनलों को आपकी छत पर सुरक्षित रखता है), और केबलिंग शामिल होती है। इसका उद्देश्य आपके घर की बिजली की ज़रूरतों को पूरा करना और अतिरिक्त बिजली को वापस ग्रिड में भेजना है, जिससे आपको अतिरिक्त आय भी हो सकती है।
2. अपनी ऊर्जा की ज़रूरतों का सही आकलन करें
सोलर सिस्टम लगाने से पहले यह जानना सबसे ज़रूरी है कि आपके घर में बिजली की खपत कितनी है। इसके लिए आप अपने पिछले 6 से 12 महीनों के बिजली बिलों की जांच कर सकते हैं। बिल पर 'यूनिट' या 'kWh' (किलोवाट-घंटा) में दी गई खपत को देखें। उदाहरण के लिए, यदि आपकी औसत मासिक खपत 300 यूनिट है, तो आपकी दैनिक खपत लगभग 10 यूनिट होगी।
एक मोटे अनुमान के अनुसार, 1 किलोवाट (kW) का सोलर सिस्टम एक दिन में लगभग 4-5 यूनिट बिजली पैदा करता है (यह धूप की उपलब्धता पर निर्भर करता है)। इस हिसाब से, 10 यूनिट की दैनिक ज़रूरत के लिए आपको लगभग 2-3 kW के सिस्टम की आवश्यकता होगी। सही क्षमता का सिस्टम चुनना महत्वपूर्ण है; बहुत छोटा सिस्टम आपकी ज़रूरतें पूरी नहीं करेगा, और बहुत बड़ा सिस्टम अनावश्यक रूप से महंगा पड़ेगा। कई सोलर कंपनियां आपकी खपत का विश्लेषण करके सही सिस्टम आकार की सिफारिश करने के लिए मुफ्त साइट मूल्यांकन भी प्रदान करती हैं।
3. सोलर पैनल के प्रकारों को जानें: मोनोक्रिस्टलाइन बनाम पॉलीक्रिस्टलाइन
बाज़ार में मुख्य रूप से दो प्रकार के सोलर पैनल उपलब्ध हैं: मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन। दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं, और आपकी ज़रूरत, बजट और छत पर उपलब्ध जगह के आधार पर सही पैनल का चुनाव करना महत्वपूर्ण है।
मोनोक्रिस्टलाइन पैनल उच्च शुद्धता वाले सिलिकॉन के एक ही क्रिस्टल से बने होते हैं। इनकी दक्षता (efficiency) ज़्यादा (18-23%) होती है, जिसका अर्थ है कि वे कम जगह में अधिक बिजली पैदा करते हैं। इनका रंग गहरा काला होता है और ये दिखने में आकर्षक लगते हैं। अधिक तापमान में भी इनका प्रदर्शन बेहतर होता है। हालांकि, ये पॉलीक्रिस्टलाइन पैनलों की तुलना में थोड़े महंगे होते हैं।
पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल सिलिकॉन के कई क्रिस्टलों को पिघलाकर बनाए जाते हैं। इनकी दक्षता (15-18%) थोड़ी कम होती है और इनका रंग नीला होता है। इन्हें समान मात्रा में बिजली पैदा करने के लिए थोड़ी अधिक जगह की आवश्यकता होती है। ये मोनोक्रिस्टलाइन पैनलों की तुलना में सस्ते होते हैं, जो उन्हें बजट के प्रति सचेत खरीदारों के लिए एक अच्छा विकल्प बनाता है।
एक टेबल पर साथ-साथ रखे गए मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन रूफटॉप सोलर पैनल के बीच का अंतर।
| विशेषता | मोनोक्रिस्टलाइन पैनल | पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल |
|---|---|---|
| दक्षता | उच्च (18-23%) | मध्यम (15-18%) |
| लागत | अधिक | कम |
| दिखावट | गहरा काला, एक समान | नीला, धब्बेदार |
| जगह की ज़रूरत | कम | अधिक |
| जीवनकाल | ~25-30 वर्ष | ~25 वर्ष |
| के लिए सर्वश्रेष्ठ | सीमित छत स्थान वाले घर | बड़े छत क्षेत्र और बजट पर ध्यान |
4. पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को समझें
पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना भारत सरकार द्वारा फरवरी 2024 में शुरू की गई एक क्रांतिकारी पहल है। इस योजना का लक्ष्य देश के 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है, जिससे उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल सके। यह योजना न केवल नागरिकों के बिजली बिल को कम करती है, बल्कि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद करती है।
इस योजना के तहत, सरकार रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना के लिए भारी सब्सिडी प्रदान करती है। लाभार्थी राष्ट्रीय पोर्टल (pmsuryaghar.gov.in) के माध्यम से सीधे आवेदन कर सकते हैं, अपने पसंदीदा विक्रेता और उपकरण चुन सकते हैं, और सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रक्रिया को पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाता है। इस योजना ने आम आदमी के लिए सौर ऊर्जा को एक आकर्षक और सुलभ विकल्प बना दिया है, जिससे 2026 और उसके बाद सौर ऊर्जा अपनाने में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है।
5. भारत में सोलर सब्सिडी कैसे काम करती है?
पीएम-सूर्य घर योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी सोलर सिस्टम की लागत को काफी कम कर देती है, जिससे यह एक आकर्षक निवेश बन जाता है। सब्सिडी की राशि सिस्टम के आकार (kW में) पर आधारित होती है। जुलाई 2026 तक लागू सब्सिडी संरचना इस प्रकार है:
- 2 kW तक के सिस्टम के लिए: ₹30,000 प्रति किलोवाट। (कुल सब्सिडी: 2 kW के लिए ₹60,000)
- 2 kW से 3 kW के बीच के सिस्टम के लिए: पहले 2 kW के लिए ₹60,000 और अतिरिक्त किलोवाट के लिए ₹18,000। (कुल सब्सिडी: 3 kW के लिए ₹78,000)
- 3 kW से अधिक के सिस्टम के लिए: अधिकतम सब्सिडी ₹78,000 पर सीमित है।
ध्यान दें: यह सब्सिडी केवल आवासीय क्षेत्र (व्यक्तिगत घरों) और हाउसिंग सोसाइटियों के लिए उपलब्ध है। सब्सिडी प्राप्त करने के लिए, आपको DISCOM (बिजली वितरण कंपनी) के पैनल में शामिल किसी विक्रेता से ही सिस्टम लगवाना होगा और BIS द्वारा प्रमाणित घरेलू रूप से निर्मित पैनल और इन्वर्टर का उपयोग करना होगा।
6. 2026 में रूफटॉप सोलर पैनल सिस्टम की वास्तविक लागत
सब्सिडी के बाद, रूफटॉप सोलर सिस्टम की वास्तविक लागत काफी प्रबंधनीय हो जाती है। लागत पैनल की गुणवत्ता, इन्वर्टर के प्रकार और इंस्टॉलेशन की जटिलता जैसे कारकों पर निर्भर करती है। 2026 में, एक औसत गुणवत्ता वाले सिस्टम की लागत लगभग ₹50,000 से ₹70,000 प्रति किलोवाट (बिना सब्सिडी के) होने का अनुमान है।
पीएम-सूर्य घर योजना की सब्सिडी घटाने के बाद शुद्ध लागत इस प्रकार हो सकती है:
- 1 kW सिस्टम: लागत ~₹55,000 - सब्सिडी ₹30,000 = शुद्ध लागत ~₹25,000
- 2 kW सिस्टम: लागत ~₹1,10,000 - सब्सिडी ₹60,000 = शुद्ध लागत ~₹50,000
- 3 kW सिस्टम: लागत ~₹1,60,000 - सब्सिडी ₹78,000 = शुद्ध लागत ~₹82,000
इन लागतों के अलावा, सरकार कम ब्याज दरों पर संपार्श्विक-मुक्त ऋण (collateral-free loans) की सुविधा भी प्रदान कर रही है, जिससे प्रारंभिक निवेश का बोझ और भी कम हो जाता है।
7. नेट मीटरिंग का जादू
नेट मीटरिंग वह प्रक्रिया है जो रूफटॉप सोलर सिस्टम को वास्तव में आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाती है। यह एक बिलिंग व्यवस्था है जिसमें आपका सोलर सिस्टम दिन के दौरान जो अतिरिक्त बिजली पैदा करता है (आपके घर में खपत होने के बाद), वह स्वचालित रूप से ग्रिड में भेज दी जाती है। आपकी बिजली कंपनी (DISCOM) इस भेजी गई बिजली को आपके मीटर में क्रेडिट कर देती है।
जब आपका सोलर सिस्टम बिजली नहीं बना रहा होता है (जैसे रात में या बादलों वाले दिनों में), तो आप ग्रिड से बिजली का उपयोग करते हैं। महीने के अंत में, आपका बिल आपके द्वारा ग्रिड को दी गई बिजली और ग्रिड से ली गई बिजली के शुद्ध अंतर पर आधारित होता है। यदि आपने खपत से ज़्यादा बिजली पैदा की है, तो वह क्रेडिट अगले महीने के बिल में जुड़ जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि आपके द्वारा उत्पन्न की गई बिजली की हर एक यूनिट का आपको लाभ मिले। भारत के लगभग सभी राज्यों में नेट मीटरिंग नीतियां लागू हैं, जो सोलर अपनाने वालों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।
8. सही सोलर इंस्टॉलर का चुनाव कैसे करें
एक अच्छा इंस्टॉलर आपके सोलर सिस्टम के प्रदर्शन और जीवनकाल के लिए महत्वपूर्ण है। गलत इंस्टॉलर का चुनाव करने से खराब प्रदर्शन, सुरक्षा संबंधी समस्याएं और वारंटी के मुद्दे हो सकते हैं। सही इंस्टॉलर चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- प्रमाणन और अनुभव: सुनिश्चित करें कि इंस्टॉलर आपकी स्थानीय DISCOM के साथ सूचीबद्ध है और उसके पास MNRE (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय) द्वारा प्रमाणित तकनीशियन हैं। उनसे उनके अनुभव और पहले किए गए प्रोजेक्ट्स के बारे में पूछें।
- ग्राहक समीक्षाएं: ऑनलाइन समीक्षाएं पढ़ें और यदि संभव हो तो उनके पिछले ग्राहकों से बात करें।
- गुणवत्ता वाले घटक: पता करें कि वे किस ब्रांड के पैनल और इन्वर्टर का उपयोग करते हैं। Tata Power Solar, Luminous, Adani Solar, और Waaree जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों को प्राथमिकता दें।
- वारंटी और सेवा: पैनलों पर आमतौर पर 25 साल की प्रदर्शन वारंटी होती है और इन्वर्टर पर 5-10 साल की। सुनिश्चित करें कि इंस्टॉलर बिक्री के बाद अच्छी सेवा और रखरखाव सहायता प्रदान करता है।
- पारदर्शी कोटेशन: कम से कम 3-4 इंस्टॉलरों से विस्तृत कोटेशन लें। कोटेशन में सभी घटकों, श्रम, और करों की लागत स्पष्ट रूप से उल्लिखित होनी चाहिए।
9. इंस्टॉलेशन प्रक्रिया: चरण-दर-चरण
एक बार जब आप इंस्टॉलर चुन लेते हैं और अनुबंध पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तो इंस्टॉलेशन प्रक्रिया आमतौर पर कुछ चरणों में पूरी होती है, जिसमें 1 से 3 सप्ताह लग सकते हैं।
- साइट सर्वेक्षण और डिजाइन: इंस्टॉलर का एक इंजीनियर आपकी साइट का दौरा करेगा। वे आपकी छत की मजबूती, छाया रहित क्षेत्र और सूर्य की दिशा का आकलन करेंगे। इस जानकारी के आधार पर, वे आपके लिए एक कस्टम सिस्टम डिजाइन तैयार करेंगे।
- सरकारी अनुमोदन: इंस्टॉलर आपकी ओर से नेट मीटरिंग और सब्सिडी के लिए DISCOM और संबंधित सरकारी विभागों में आवेदन करेगा। इसमें कुछ दिन से लेकर कुछ सप्ताह लग सकते हैं।
- सामग्री की खरीद: अनुमोदन मिलने के बाद, इंस्टॉलर पैनल, इन्वर्टर और अन्य आवश्यक सामग्री का ऑर्डर देगा।
- स्थापना: तकनीशियनों की एक टीम आपकी छत पर माउंटिंग स्ट्रक्चर स्थापित करेगी, उस पर सोलर पैनल लगाएगी, और इन्वर्टर व केबलिंग का काम पूरा करेगी। इसमें आमतौर पर 1-3 दिन लगते हैं।
- निरीक्षण और कमीशनिंग: DISCOM का एक अधिकारी स्थापना का निरीक्षण करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि यह सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन करता है। इसके बाद, वे आपके पुराने मीटर को एक नए नेट मीटर से बदल देंगे और सिस्टम को चालू (कमीशन) कर दिया जाएगा।
10. रखरखाव और सफाई: अपने निवेश को सुरक्षित रखें
रूफटॉप सोलर सिस्टम का रखरखाव बहुत कम होता है, लेकिन उनके अधिकतम प्रदर्शन के लिए नियमित देखभाल ज़रूरी है। पैनलों पर धूल, गंदगी, या पक्षियों की बीट जमने से उनकी बिजली उत्पादन क्षमता 15-25% तक कम हो सकती है, खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे धूल भरे क्षेत्रों में।
सर्वोत्तम परिणामों के लिए, हर 15-20 दिनों में अपने पैनलों को साफ करने की सलाह दी जाती है। सफाई के लिए सुबह या शाम का समय सबसे अच्छा होता है जब पैनल ठंडे हों। केवल मुलायम कपड़े या स्पंज और सादे पानी का उपयोग करें। कठोर ब्रश या रासायनिक क्लीनर का उपयोग करने से बचें क्योंकि वे पैनल की सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, साल में एक बार किसी पेशेवर से सिस्टम की पूरी जांच (इन्वर्टर, केबलिंग, कनेक्शन) करवाना एक अच्छा विचार है।
11. दीर्घकालिक वित्तीय लाभ और निवेश पर वापसी (ROI)
रूफटॉप सोलर पैनल एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक निवेश की तरह लग सकता है, लेकिन यह लंबे समय में भारी बचत प्रदान करता है। निवेश पर वापसी (Return on Investment - ROI) वह समय है जो आपको बिजली बिलों में हुई बचत के माध्यम से अपने शुरुआती निवेश को वसूलने में लगता है।
भारत में, सब्सिडी के साथ, एक आवासीय सोलर सिस्टम का ROI आमतौर पर केवल 4-5 वर्ष होता है। उदाहरण के लिए, एक 3 kW का सिस्टम, जिसकी शुद्ध लागत ₹82,000 है, औसतन प्रति वर्ष लगभग 4,200 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। यदि बिजली की दर ₹7 प्रति यूनिट है, तो यह प्रति वर्ष लगभग ₹29,400 की बचत है। इस दर पर, आप 3 साल से भी कम समय में अपनी लागत वसूल लेंगे। चूंकि पैनलों का जीवनकाल 25 वर्ष से अधिक होता है, इसलिए ROI अवधि के बाद अगले 20+ वर्षों तक आपको लगभग मुफ्त बिजली मिलती है।
एक 3kW सिस्टम के लिए ROI की गणना
| विवरण | राशि (₹) |
|---|---|
| सिस्टम की अनुमानित लागत | 1,60,000 |
| सरकारी सब्सिडी | - 78,000 |
| आपकी शुद्ध लागत | 82,000 |
| वार्षिक बिजली उत्पादन | ~4,200 यूनिट |
| बिजली की दर (अनुमानित) | ₹7 / यूनिट |
| वार्षिक बचत | 29,400 |
| निवेश पर वापसी (ROI) अवधि | ~2.8 वर्ष |
12. भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य: 2026 और उससे आगे
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते सौर ऊर्जा बाजारों में से एक है। सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें सौर ऊर्जा की एक प्रमुख भूमिका है। पीएम-सूर्य घर जैसी योजनाएं इस महत्वाकांक्षा को जमीनी स्तर पर साकार करने में मदद कर रही हैं।
भविष्य में, हम सौर पैनल प्रौद्योगिकी में और भी सुधार की उम्मीद कर सकते हैं- जैसे कि उच्च दक्षता वाले पैनल, बेहतर बैटरी स्टोरेज समाधान, और AI-संचालित ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली। बैटरी स्टोरेज के सस्ता और सुलभ हो जाने से, घर पूरी तरह से ग्रिड-स्वतंत्र हो सकेंगे, जिससे 24/7 सौर ऊर्जा का उपयोग संभव हो जाएगा। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ेगी और लागत कम होगी, रूफटॉप सोलर पैनल सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि हर नए घर के लिए एक मानक बन जाएगा। यह एक ऐसे भविष्य की ओर एक स्पष्ट संकेत है जहां ऊर्जा स्वच्छ, सस्ती और सभी के लिए सुलभ होगी।
Bottom Line
2026 में, रूफटॉप सोलर पैनल अपनाना एक स्मार्ट आर्थिक निर्णय होने के साथ-साथ एक जिम्मेदार पर्यावरणीय विकल्प भी है। सरकारी सब्सिडी, कम होती लागत और नेट मीटरिंग जैसे लाभों के साथ, अपने घर को सौर ऊर्जा से रोशन करने का इससे बेहतर समय कभी नहीं रहा। यह एक ऐसा निवेश है जो न केवल आपके बिजली के बिल को खत्म करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और स्थायी ग्रह बनाने में भी मदद करता है। सही जानकारी और योजना के साथ, आपकी छत आपकी सबसे मूल्यवान संपत्ति में से एक बन सकती है।
“आपकी छत पर लगा सोलर पैनल सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि एक बेहतर और स्थायी भविष्य का निर्माण करता है।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- एक 3kW सोलर सिस्टम की कीमत क्या है?
- एक 3kW रूफटॉप सोलर सिस्टम की लागत बिना सब्सिडी के लगभग ₹1,60,000 होती है। पीएम-सूर्य घर योजना के तहत ₹78,000 की सब्सिडी के बाद, उपभोक्ता के लिए इसकी प्रभावी लागत लगभग ₹82,000 रह जाती है। यह लागत इंस्टॉलर और उपयोग किए गए घटकों की गुणवत्ता के आधार पर थोड़ी भिन्न हो सकती है।
- क्या मैं सोलर पैनल पर लोन ले सकता हूँ?
- हाँ, पीएम-सूर्य घर योजना के तहत, सरकार ने बैंकों को आवासीय रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए आकर्षक और कम ब्याज दरों पर ऋण प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया है। 7 kW तक के सिस्टम के लिए संपार्श्विक-मुक्त (collateral-free) ऋण उपलब्ध हैं, जिससे उपभोक्ताओं के लिए प्रारंभिक निवेश करना आसान हो जाता है।
- सोलर पैनल को साफ करने की आवश्यकता कितनी बार होती है?
- सोलर पैनल को अधिकतम दक्षता पर काम करते रहने के लिए नियमित सफाई की आवश्यकता होती है। आमतौर पर, उन्हें हर 15-20 दिनों में एक बार साफ करने की सलाह दी जाती है, खासकर यदि आप धूल भरे क्षेत्र में रहते हैं। सफाई के लिए सादे पानी और एक मुलायम कपड़े का उपयोग करना सबसे अच्छा है।
- नेट मीटरिंग क्या है और यह कैसे काम करती है?
- नेट मीटरिंग एक बिलिंग व्यवस्था है जिसमें आपका सोलर सिस्टम द्वारा उत्पन्न अतिरिक्त बिजली ग्रिड को निर्यात की जाती है। आपकी बिजली कंपनी इस निर्यात की गई ऊर्जा को रिकॉर्ड करती है और इसे आपके कुल बिजली बिल से घटा देती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आपके द्वारा उत्पन्न की गई हर यूनिट का आपको लाभ मिले।
- सोलर पैनल की वारंटी कितने साल की होती है?
- अधिकांश प्रतिष्ठित ब्रांडों के सोलर पैनल पर 25 साल की प्रदर्शन वारंटी (performance warranty) होती है। इसका मतलब है कि कंपनी गारंटी देती है कि 25 साल बाद भी पैनल अपनी मूल क्षमता का कम से कम 80-85% उत्पादन करेगा। इन्वर्टर पर आमतौर पर 5 से 10 साल की वारंटी होती है।
- क्या मैं अपने मौजूदा इन्वर्टर और बैटरी के साथ सोलर पैनल का उपयोग कर सकता हूँ?
- यह आपके मौजूदा इन्वर्टर के प्रकार पर निर्भर करता है। सामान्य पावर बैकअप इन्वर्टर ग्रिड-टाई सोलर सिस्टम के साथ संगत नहीं होते हैं। नेट मीटरिंग का लाभ उठाने के लिए आपको एक 'सोलर इन्वर्टर' या 'ग्रिड-टाई इन्वर्टर' की आवश्यकता होगी। हालाँकि, कुछ हाइब्रिड मॉडल मौजूद हैं जो बैटरी और ग्रिड दोनों के साथ काम कर सकते हैं।
स्रोत
- PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana - National Portal (Official)
- Ministry of New and Renewable Energy (MNRE), Government of India - Solar Rooftop
- Operational Guidelines for PM-Surya Ghar: Muft Bijli Yojana (Feb 2024)
- Explainer: How does the rooftop solar scheme work? - The Hindu (March 2024)
- State of Solar in India – CEEW Market Handbook (May 2023)