संस्कृतिसंझा की ओट में: मालवा की लुप्त होती भित्ति चित्रकारी का भविष्यमिट्टी की महक और कुंवारी लोक-कला के बीच, संझा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्त्री-अभिव्यक्ति का एक मौन घोषणापत्र है।30 जून 2026·5 मिनट पढ़ें