
व्यवसाय
मौन का नेतृत्व: क्या 'क्वाइट लीडरशिप' भारतीय स्टार्टअप्स का नया मंत्र है?
आक्रामक कॉर्पोरेट संस्कृति के बीच, धीमेपन और गहराई से सोचने वाले नेतृत्व के ज़रिए स्थायी कंपनियाँ खड़ी करने की एक अनकही कहानी।
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आक्रामक कॉर्पोरेट संस्कृति के बीच, धीमेपन और गहराई से सोचने वाले नेतृत्व के ज़रिए स्थायी कंपनियाँ खड़ी करने की एक अनकही कहानी।

क्यों आज के 'डिजिटल-फर्स्ट' रिश्तों में हम पास होकर भी दूर महसूस करते हैं और इसका समाधान क्या है?

क्यों उत्पादकता की अंधी दौड़ से बाहर निकलकर कुछ न करना ही सफलता का असली पैमाना बन गया है।